काजू बादाम से महंगी सब्जी – सांगरी: राजस्थान का अनमोल खजाना
राजस्थान की रेतीली धरती पर उगने वाली एक खास सब्जी ने हाल ही में सुर्खियां बटोरी हैं-यह सब्जी है सांगरी, जिसे अब GI Tag भी मिल गया है। काजू बादाम से महंगी सब्जी के नाम से मशहूर सांगरी की कीमत आजकल 1200-1500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो इसे भारत की सबसे महंगी सब्जियों में शुमार करती है। सांगरी की लोकप्रियता न केवल इसकी कीमत, बल्कि इसके स्वाद, पोषण और पारंपरिक महत्व के कारण भी है।
सांगरी क्या है? – परिचय और उत्पत्ति
सांगरी खेजड़ी (Prosopis cineraria) के पेड़ की फलियां होती हैं, जो मुख्य रूप से राजस्थान के थार रेगिस्तान, चूरू, शेखावटी, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर और जोधपुर जैसे इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगती हैं। यह कोई साधारण सब्जी नहीं, बल्कि मरुस्थल की जीवनरेखा है। सांगरी की फलियां गर्मी में पकती हैं और सूखने के बाद इनका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है।
सांगरी की कीमत क्यों है काजू-बादाम से भी ज्यादा?
- ताजा सांगरी की कीमत ₹150-200 प्रति किलो रहती है, लेकिन सूखने के बाद यह 1200-1500 रुपये प्रति किलो तक बिकती है।
- उत्पादन सीमित है, क्योंकि यह केवल पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में ही प्राकृतिक रूप से उगती है।
- बेमौसम बारिश, तेज गर्मी और रोग के कारण फसल प्रभावित होती है, जिससे कीमतें और बढ़ जाती हैं।
- मांग देश-विदेश में बहुत ज्यादा है, खासकर होटल इंडस्ट्री और NRIs के बीच।
- सूखे मेवे (काजू, बादाम) की तुलना में सांगरी की कीमत कहीं ज्यादा है, क्योंकि इसकी उपलब्धता सीमित और स्वाद अनूठा है।
| उत्पाद |
औसत कीमत (₹/किलो) |
उपलब्धता |
| सांगरी (सूखी) |
1200-1500 |
सीमित, केवल राजस्थान |
| काजू |
800 |
भारतभर |
| बादाम |
800-1000 |
भारतभर |
सांगरी का पारंपरिक और ऐतिहासिक महत्व
- 1899-1900 के अकाल के दौरान राजस्थान के लोगों ने सांगरी और केल की फलियां खाकर जीवन बचाया था।
- यह राजस्थान के पारंपरिक भोजन का हिस्सा है-कैर-सांगरी की सब्जी, अचार और कुमटिया के साथ इसका स्वाद बेमिसाल होता है।
- मारवाड़ी परिवारों और शाही भोजनों में सांगरी को खास स्थान प्राप्त है।
सांगरी की खेती और उत्पादन
- सांगरी की खेती नहीं होती, यह प्राकृतिक रूप से खेजड़ी के पेड़ों पर उगती है।
- उत्पादन पूरी तरह मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
- हर साल लगभग 25 टन सांगरी की खपत होती है, लेकिन इस बार 35% फसल बर्बाद हो गई, जिससे कीमतें दोगुनी हो गईं।
- कैर-सांगरी की जोड़ी राजस्थान के रेगिस्तानी भोजन की शान है।
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सांगरी के पोषक तत्व और स्वास्थ्य लाभ
- सांगरी में प्रोटीन, आयरन, जिंक, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर, कैल्शियम और फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
- यह इम्यूनिटी बूस्टर है, शरीर को रोगों से लड़ने की ताकत देती है।
- सांगरी पाचन तंत्र को मजबूत करती है, हड्डियों को ताकत देती है और शरीर को रेगिस्तानी घोड़े जैसी शक्ति देती है।
- इसमें मौजूद फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है और विटामिन सी शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
सांगरी की डिमांड और GI Tag का महत्व
- देश-विदेश में सांगरी की भारी मांग है, खासकर NRIs और होटल इंडस्ट्री में।
- GI Tag मिलने से सांगरी को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है, जिससे किसानों और व्यापारियों को फायदा होगा5।
- GI Tag का मतलब है कि सांगरी की गुणवत्ता, स्वाद और पहचान अब कानूनी रूप से सुरक्षित है, जिससे इसकी ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी।
सांगरी कैसे बनती है – पारंपरिक रेसिपी
कैर-सांगरी की सब्जी राजस्थान का पारंपरिक व्यंजन है, जिसे खास मसालों और तेल के साथ बनाया जाता है।
सामग्री:
- सूखी सांगरी (100 ग्राम)
- सूखी केर (50 ग्राम)
- सरसों का तेल (2 टेबलस्पून)
- हींग, जीरा, सौंफ, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, नमक स्वादानुसार
विधि:
- सांगरी और केर को रातभर पानी में भिगो दें।
- अगली सुबह इन्हें उबाल लें।
- कड़ाही में तेल गरम करें, हींग, जीरा, सौंफ डालें।
- उबली सांगरी-केर डालें, मसाले डालें और अच्छे से भूनें।
- धीमी आंच पर 10-15 मिनट पकाएं।
- स्वादिष्ट कैर-सांगरी की सब्जी तैयार!
सांगरी से जुड़े रोचक तथ्य
- सांगरी को “मारवाड़ का मेवा” भी कहा जाता है।
- यह पूरी तरह प्राकृतिक है, किसी भी केमिकल या खाद का इस्तेमाल नहीं होता।
- सांगरी की सब्जी कई दिनों तक खराब नहीं होती, इसलिए रेगिस्तानी इलाकों में इसे स्टोर करके रखा जाता है।
- पहले के समय में राजा-महाराजा भी सांगरी का सेवन करते थे।
सांगरी की चुनौतियां और भविष्य
- प्राकृतिक आपदाएं, कीट और बेमौसम बारिश से फसल प्रभावित होती है।
- मिलावट का खतरा बढ़ रहा है, कुछ किसान केमिकल का प्रयोग भी करने लगे हैं।
- GI Tag मिलने से उम्मीद है कि सांगरी की शुद्धता और ब्रांड वैल्यू बनी रहेगी।
सांगरी की अंतरराष्ट्रीय पहचान
- विदेशों में भी सांगरी की डिमांड है, खासकर NRIs और भारतीय रेस्तरां में।
- GI Tag से अब सांगरी को वैश्विक बाजार में प्रमोट किया जा सकेगा।
FAQs: काजू बादाम से महंगी सब्जी सांगरी से जुड़े सवाल
सांगरी क्या है और कहां मिलती है?
सांगरी खेजड़ी के पेड़ की फलियां हैं, जो मुख्य रूप से राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगती हैं।
सांगरी की कीमत इतनी ज्यादा क्यों है?
सीमित उत्पादन, प्राकृतिक उगाव, मौसम की मार और भारी डिमांड के कारण सांगरी की कीमत काजू-बादाम से भी ज्यादा है
more।
सांगरी में कौन-कौन से पोषक तत्व हैं?
सांगरी में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम, जिंक और फॉस्फोरस भरपूर मात्रा में होते हैं
more।
सांगरी का GI Tag क्या है?
GI Tag (Geographical Indication) एक कानूनी टैग है, जिससे सांगरी की गुणवत्ता, पहचान और ब्रांड वैल्यू को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलती है5।
सांगरी की सब्जी कैसे बनती है?
सांगरी को केर के साथ मसालों में पकाकर स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है, जो राजस्थान का पारंपरिक व्यंजन है।
क्या सांगरी विदेशों में भी मिलती है?
हां, सांगरी की डिमांड विदेशों में भी है, खासकर NRIs और भारतीय रेस्तरां में।
सांगरी की खेती क्यों नहीं होती?
सांगरी प्राकृतिक रूप से खेजड़ी के पेड़ों पर उगती है, इसकी खेती नहीं की जाती।
सांगरी में मिलावट का खतरा कितना है?
कुछ किसान केमिकल का प्रयोग करने लगे हैं, जिससे मिलावट का खतरा बढ़ गया है।
निष्कर्ष: काजू बादाम से महंगी सब्जी सांगरी की खासियत
सांगरी न सिर्फ राजस्थान की शान है, बल्कि अब GI Tag मिलने के बाद यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुकी है। काजू बादाम से महंगी सब्जी के रूप में सांगरी ने साबित कर दिया है कि भारतीय रेगिस्तानी भूमि पर भी अनमोल खजाने छुपे हैं। इसकी पोषण, स्वाद, पारंपरिक महत्व और सीमित उपलब्धता इसे खास बनाती है। अगर आपको भी कभी मौका मिले, तो जरूर चखिए राजस्थान की यह अनमोल सब्जी-सांगरी |