Home स्वास्थ्य क्या आप बच्चों में Food Allergy की वजह बन रहे हैं

क्या आप बच्चों में Food Allergy की वजह बन रहे हैं

Food Allergy

बच्चों में Food Allergy का बढ़ता खतरा

आजकल बच्चों में फूड एलर्जी एक सामान्य लेकिन तेज़ी से बढ़ती समस्या बन चुकी है। अमेरिका जैसे देशों में हर 13 में से 1 बच्चा फूड एलर्जी से जूझ रहा है[^1]। माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या आपकी यह कोशिश उन्हें और अधिक नुकसान पहुंचा रही है?

इस ब्लॉग में जानें:

  • एलर्जेन फूड्स को कब और कैसे देना चाहिए?
  • फूड एलर्जी को रोकने के वैज्ञानिक तरीके
  • आम पैरेंटिंग गलतियां जो एलर्जी बढ़ाती हैं
  • प्रैक्टिकल टिप्स जो तुरंत अपनाए जा सकते हैं

आंकड़े बताते हैं: फूड एलर्जी तेजी से बढ़ रही है

CDC (Centers for Disease Control and Prevention) के मुताबिक 1997 से 2011 के बीच बच्चों में फूड एलर्जी में करीब 50% की बढ़ोतरी हुई है[^2]।

आम एलर्जेन फूड्स:

  • मूंगफली
  • अंडा
  • दूध
  • सोया
  • गेहूं
  • मछली
  • शंख/झींगे
  • ट्री नट्स (जैसे बादाम, अखरोट)

संभावित कारण:

  • अत्यधिक स्वच्छता (Hygiene Hypothesis)
  • एलर्जेन फूड्स को देर से देना
  • अनुवांशिक कारण
  • पर्यावरणीय बदलाव

गलती #1: एलर्जेन फूड्स को देर से देना

बहुत से माता-पिता डर के कारण मूंगफली, अंडा जैसे फूड्स 1 या 2 साल तक टालते हैं। लेकिन ये डर पुराने जमाने की सोच है।

वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?

  • LEAP स्टडी के अनुसार अगर बच्चों को 4–6 महीने की उम्र में मूंगफली दी जाए, तो उनमें एलर्जी की संभावना 81% तक कम हो जाती है[^3]।
  • NIAID Guidelines भी यही कहती हैं: उच्च जोखिम वाले बच्चों को भी एलर्जेन फूड्स जल्दी देना चाहिए

गलती #2: अत्यधिक Hypoallergenic उत्पादों का इस्तेमाल

अत्यधिक एलर्जी-रहित फॉर्मूला दूध, साबुन, स्किन केयर प्रोडक्ट्स से बच्चे एलर्जेन के संपर्क में ही नहीं आते, जिससे उनका शरीर उसे पहचान नहीं पाता और बाद में रिएक्ट करता है।

स्किन के जरिए एलर्जी?

अगर एलर्जेन पहले स्किन के जरिए मिल जाए और मुंह से नहीं दिया गया हो, तो शरीर उसे एलर्जन मान लेता है।

गलती #3: डाइट में विविधता की कमी

सिर्फ खिचड़ी और दाल चावल खिलाने से बच्चे के इम्यून सिस्टम को ट्रेनिंग नहीं मिलती

विविधता क्यों ज़रूरी है?

  • शरीर अलग-अलग प्रोटीन को सहन करना सीखता है
  • पेट में अच्छे बैक्टीरिया (Gut Microbiome) बनते हैं
  • बार-बार एक्सपोजर से शरीर एलर्जेन को पहचानता और सहन करता है

गलती #4: मेडिकल सलाह लेने में देर करना

अक्सर माता-पिता तब डॉक्टर के पास जाते हैं जब रिएक्शन हो चुका होता है। लेकिन तब तक एलर्जी पक्की हो चुकी होती है

क्या करें?

  • अगर बच्चे को eczema या फैमिली हिस्ट्री है, तो शुरुआत से ही डॉक्टर से सलाह लें
  • फूड्स देने से पहले एलर्जी रिस्क असेसमेंट करवाएं

एलर्जेन फूड्स कैसे और कब दें?

✔️ स्टेप-बाय-स्टेप गाइड:

  1. उम्र: 4–6 महीने (बच्चा बैठ सके और मुंह में खाना ले सके)
  2. कम मात्रा में शुरुआत करें – जैसे आधा चम्मच पीनट बटर को पानी या दलिया में मिलाकर
  3. रिएक्शन पर नजर रखें – रैश, उल्टी, सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
  4. बार-बार दें – एक बार देने से फायदा नहीं होता, 2–3 बार हफ्ते में दें
  5. एक-एक कर फूड्स ट्राई करें – दो फूड्स एक साथ ना दें

 पैरेंट्स की असली कहानियां

“मैंने मूंगफली देने में बहुत देर कर दी। 2 साल की उम्र में जब दी, तो उसे तेज़ एलर्जी हो गई। काश पहले डॉक्टर से सलाह ली होती।”
– करन, मुंबई

“हमने डॉक्टर की सलाह से शुरुआत में ही अंडा और मूंगफली दी। हमारी बेटी को आज तक कोई एलर्जी नहीं है।”
– सीमा, लखनऊ

 क्या एलर्जी सिर्फ अनुवांशिक होती है?

अनुवांशिकता (Genetics) जरूरी है, लेकिन पर्यावरणीय एक्सपोजर उतना ही महत्वपूर्ण है।

Genetics बंदूक लोड करती है,
Environment ट्रिगर दबाता है।

मतलब: सही समय पर फूड देना जेनेटिक एलर्जी रिस्क को भी मात दे सकता है

 दुनियाभर में एलर्जी की स्थिति

  • इज़राइल में बच्चे शुरू से Bamba (पीनट स्नैक) खाते हैं – वहां मूंगफली एलर्जी बहुत कम है
  • पश्चिमी देशों में देरी से फूड्स देने के कारण एलर्जी बहुत अधिक है

यह बताता है कि डायट पैटर्न से एलर्जी की संभावना बदलती है

 आम मिथक बनाम सच्चाई

मिथक सच्चाई
1 साल तक एलर्जेन फूड्स ना दें 4–6 महीने में देना बेहतर
केवल ब्रेस्टफीडिंग से एलर्जी नहीं होगी यह मदद कर सकती है, पर पूरी गारंटी नहीं
स्किन से एलर्जेन मिलना सुरक्षित है यह एलर्जी बढ़ा सकता है
अगर भाई/बहन को एलर्जी है, तो बच्चा भी एलर्जिक होगा जरूरी नहीं – डॉक्टर से सलाह लें

 एलर्जेन फूड चार्ट (6–12 महीने)

उम्र फूड टिप
4–6 महीने मूंगफली (थिन), उबला अंडा डॉक्टर की निगरानी में दें
6–8 महीने दही, पनीर, गेहूं कम मात्रा से शुरू करें
8–10 महीने मछली, सोया दिन के समय दें
10–12 महीने झींगे, ट्री नट्स पाउडर साबुत नट्स न दें – चोकिंग का खतरा
सप्लीमेंट्स और प्रोबायोटिक्स – क्या ये मदद करते हैं?
  • कुछ स्टडीज़ के अनुसार प्रोबायोटिक्स gut को हेल्दी बनाते हैं
  • विटामिन D की कमी भी एलर्जी को बढ़ा सकती है

बच्चों को सप्लीमेंट देने से पहले डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें।

🔗 बाहरी लिंक (External Links)

  1. भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी – खाद्य एलर्जी दिशानिर्देश
  2. FARE – फूड एलर्जी रिसर्च एंड एजुकेशन
  3. NIAID – एलर्जी रोकथाम दिशानिर्देश

🔚 निष्कर्ष: अब आप क्या कर सकते हैं?

बच्चों में फूड एलर्जी से बचाव संभव है — बशर्ते आप समय रहते सही कदम उठाएं। डर के कारण फूड्स टालना अब पुराने जमाने की बात है।

जानिए, समझिए और सही समय पर फूड दें —
ताकि आपका बच्चा एलर्जी-रहित, स्वस्थ जीवन जी सके।

 सामान्य प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या मैं एक साथ दो एलर्जेन फूड्स दे सकता हूं?
नहीं, एक बार में एक ही फूड दें।
Q2. एलर्जी रिएक्शन हो तो क्या करें?
तुरंत फूड बंद करें और डॉक्टर से मिलें।
Q3. सिर्फ ब्रेस्टफीडिंग से एलर्जी से बचाव होगा?
नहीं, फूड्स की एक्सपोजर भी जरूरी है।

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